चीन से चंद सवाल

January 03 2011


चीनी प्रधानमंत्री वन चियापाओ अपने भारी लाव लश्कर के साथ भारत आकर चले गए पर अपने पीछे कई अनुत्तरित सवाल भी छोड़ गए हैं। भारतीय राजनेताओं ने चीनी प्रधानमंत्री से स्पष्ट कर दिया कि भारत और चीन देश की आंतरिक नीतियों पर भले ही एक-दूसरे के विरोधी हैं, विदेश नीति पर दोनों साथ-साथ हैं। भारत ने चीन से यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत में चीन के दोस्त बहुत कम हैं, साथ ही चीन जिस क्वालिटी का सामान हमें भेजता है उसकी क्वालिटी ठीक नहीं है। चीनी प्रधानमंत्री से भारत यह भी आश्वासन चाहता था कि वे स्पष्ट करे कि चीन भारत का शत्रु नहीं है और आम भारतीय के मन में चीन के प्रति ‘गुडविल’ भी नहीं है। जब नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज चीनी प्रधानमंत्री से मिलीं तो उन्होंने उनसे दो टूक जानना चाहा कि ‘आतंकवाद पर चीन का रुख क्या है?’ तो जवाब मिला कि ‘चीन आतंकवाद के खिलाफ है।’ सुषमा ने फिर जानना चाहा कि उनकी पाकिस्तान और भारत के प्रति क्या राय है? तो चीनी प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘इस पर चीन न्यूट्रल है।’ इस पर सुषमा ने उन्हें घेरा और अपने खास आक्रामक अंदाज में भाजपा नेत्री ने चीनी प्रधानमंत्री से दो टूक कहा कि ‘आतंक फैलाने वाले और आतंक का शिकार होने वाले के बीच आप न्यूट्रल कैसे हो सकते हैं? इसका यह अर्थ निकाला जाए कि आप आतंकवाद के साथ हो?’ इस पर सचमुच बगले झांकते दिखे चीनी प्रधानमंत्री।

 
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